Wednesday, 29 June 2016

मत सता गरीब को



"क्या हुआ जयंती ? आज बड़े उदास हो ? "

"हाँ , वो शशांक की माँ से जब से मिलकर आया हूँ मन बहुत खराब है ."


"क्यों, क्या हुआ उन्हें?"


"क्या कहें अब ऐसी औलाद को जिसे आज माँ ही बुरी लगने लगी . कल तक तो आगे पीछे डोलते थे लेकिन जिस दिन से बेचारी ने बेटों को मुख्तियार बना दिया मानो अपने हाथ ही काट लिए . अब घर पर कब्ज़ा कर लिया और माँ को एक कोठरी में जगह दे दी . यहाँ तक कि उससे एक तरह से सब सम्बन्ध ही ख़त्म से कर लिए . लाखों रुपया कमाने वाले न बोलते हैं न हाल चाल पूछते हैं . बस दो वक्त की रोटियां भी उनकी बीवियाँ अहसान सा करके देती हैं . शरीर भी साथ नहीं देता लेकिन हौसले से सब झेलती रही ये सोच माना पति से हमेशा छत्तीस का आँकड़ा रहा , उसके लिए सिर्फ एक भोग्या ही रही , उससे इतर भी स्त्री होती है या उसकी भी कुछ इच्छाएं होती हैं , उसका कोई लेना देना नहीं रहा लेकिन औलाद तो मेरी है , वो मेरा दर्द समझेगी , ये सोच हर आतंक पति का सहती गयी . आज न पति उसका न बेटे . जाए तो कहाँ जाए ? किसके सहारे जीवन यापन करे ?" बहुत ही परेशान स्वर में जयंती ने कहा .

"अजी छोड़े ऐसे पति को और लात मारे ऐसी औलाद के . अपने दम पर जीये ." राम ने जवाब दिया .

"कहना जितना आसान होता है न सहना उतना ही मुश्किल . अपने पेट जाए जब ऐसा व्यवहार करते हैं तो खून के आंसू रोती है एक माँ ."

"जानते हैं हम इस बात को तभी कह रहे हैं एक तो उनकी परवाह करना छोड़ दे . दूसरे क्यों कोठरी में जीवन यापन करती है , अपने हक़ के लिए लडे ."

"वो तो ठीक है लेकिन अपनों से लड़ना सबसे मुश्किल होता है और फिर कोई सहारा तो हो जिसके दम पर लड़ाई लड़ी जाए . वो इसी बात का तो फायदा उठा रहे हैं जानते हैं अकेली है . बेचारी बस चुपके चुपके आंसू बहाती है ."

"देखना उसके आँसू , उसकी आहें एक दिन ऐसी तबाही लायेंगी बेटे कहीं के नहीं रहेंगे शायद उस दिन उन्हें अपनी माँ का दर्द समझ आये लेकिन तब तक शायद बहुत देर हो चुकी हो ...."

"कमज़र्फ औलादें आजकल की जाने किस मिटटी की बनी होती हैं . माँ दर्द से बिलबिला भी रही हो तो भी उसकी चीख सुनाई नहीं देती और यदि बीवी या बच्चे के सर में दर्द भी हो जाए तो सारे काम छोड़ उसकी तरफ दौड़ पड़ते हैं . कैसे इतने निर्मोही और कृतघ्न हो जाते हैं समझ नहीं आता . कैसे भूल जाते हैं यही माँ थी जिसने सब कुछ सहा सिर्फ उनकी खातिर"

"चिंता न कर जयंती भाई ,वो कहते हैं न --- मत सता गरीब को वो रो देगा , गर सुन लेगा उसका खुदा तुझे दुनिया से खो देगा."

मत भूल जो तूने बोई है वो ही फसल काटेगा
अपने किये पर एक दिन चकरघिन्नी सा नाचेगा
ये वक्त वक्त की बात है लाठी तेरे हाथ है
जिस दिन पड़ेगी उसकी बेहिसाब काँपेगा

Thursday, 7 January 2016

ShAAdi.CoM

रिलेशनशिप, जिसे ज्ञानी लोग चक्कर भी बोलते हैं, उसके आमतौर पर तीन पड़ाव होते हैं। चुम्मा-चटौव्वल, मान-मनौव्वल और सर-फुटौवल्ल।
चुम्मा-चटौवल्ल से तात्पर्य यहाँ रोमान्स से है। हालाँकि ये आगाह कर दे कि ये शब्द सुन के ही अपनी उम्मीदों के घोड़े न दौड़ायें। कइयों को हाथ पकड़ने से ज़्यादा का सुअवसर नहीं मिलता पहले स्टेज में। बहरहाल, पहले स्टेज में सबको अपनी प्रेमकहानी युगयुगान्तर तक चलने वाली सातो जनम की सुखद दास्तान लगती है। ये वो वक़्त है जब हर रोमांटिक गाना आपके जीवन की कहानी लगता है।
उस
के बाद बारी आती है मान-मनौवल्ल की। इस स्टेज में छोटे मोटे झगड़े होते हैं। इस वक़्त आपको आपके साथी का रूठना या जलना थोडा क्यूट सा लगता है। और झगड़ों को अवधि भी छोटी होती है। महज़ दूसरे की तारीफों के पुल बांधने से, एक स्वीट सा मैसेज भेजने से और ज़्यादा से ज़्यादा किसी के भी एक दो आँसू ढलक जाने से सारी समस्या सॉल्व हो जाती है, और तो और ऐसी लड़ाईयों के बाद कुछ स्पेशल भी मिल सकता है। wink इमोटिकॉन
अब आता है वो स्टेज जो 90 प्रतिशत चक्करों का काल साबित होता है। माथा-फुटौवल्ल सबसे खतरनाक और मर्मान्तक पीड़ा देने वाला पड़ाव है। ये तब आता है जब वही झगड़े और वही जलन क्यूट नहीं रहते बल्कि कभी कभी तो आपका मन अगले को चोकस्लैम मारने का करता है। वही बातें जो कभी भीषण रोमांटिक मालूम होती थी वो अब irritating और चेप लगती है। जिसपे कभी aww होता था उसी पर अब awwkthuu करने का जी करता है। सबसे गंभीर स्टेज में आपका दैनिक झगड़ा और रोज़ ब्रेक अप होता है। अब जा के आपको लगता है कि प्यार मोहब्बत चूतियों का रोग है और हर उस लम्हे को कोसते है जब आपने चूतिया बनना क़ुबूल किया था। संभवतः ये स्टेज आपके प्यार के लिए जानलेवा साबित होगा but अगर तब भी survive कर गए तो आपका राम ही मालिक है क्योंकि आपको सच्चा वाला इश्क़ हुआ है। हालाँकि इसमें भी खुश होने की बात नहीं। अगर आपने जाति धर्म मिला के चक्कर नहीं चलाया था तो आपका जय हिन्द। मगर इसके अलावा जो बचते हैं उनको भी खुश होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि इसके बाद एक बहुत बड़ा हादसा आपका इंतज़ार कर रहा है
, शादी!