आप सोच भी नहीं सकते 1990 के दौर की फिल्मे देखते हुए बड़ा हो रहा कसबे गाँव का नौजवान इंग्लिश में "oh shit " बोलने को कितना तरसता है. वो सोचता है की क़यामत से क़यामत तक में आमिर खान "oh shit " बोल देता है, मैंने प्यार किया का सलमान खान भी, इनकी जिन्दगी में कितने मौके और कितनी घटनाएं हैं की ये उनपे "oh shit " बोल सकते हैं लेकिन मेरे जीवन में ऐसा कुछ नहीं जिसपे मुझे भी "oh shit " बोलने का मौका मिले. मेरे जीवन में तो जब भी माँ उबलते दूध की रखवाली को छोड़ के जाती है, और मै इन्तेजार करता की जब दूध उबल के निकलेगा तो मैं "oh shit " बोलके गैस जल्द से बंद कर दूंगा और मेरे मन की मुराद पूरी हो जायेगी, उस से पहले ही मेरे अरमानों को कुचलती माँ रसोई में आ जाती है और मुझे थपेड कर "oh shit " बोलने से वंचित कर दिया जाता, क्रिकेट खेलते वक़्त जानबूझ के कैच छोड़ने पर "oh shit " बोलने से पहले ही बॉलर गालियाँ देना शुरू कर देता और मुझे नए मौके का इन्तेजार करना पड़ता, स्कूल से लौटते वक़्त तेजी से साइकिल चलाता हुआ आता, अक्सर ये सोचता की काश सामने से कोई लड़की भी साइकिल से रोंग साइड आ रही हो और मैं अपनी साइकिल से पॉवर ब्रेक मारू और मेरी साइकिल उसकी साइकिल के बिलकुल पास जाके रुके और मैं बिलकुल फ़िल्मी हीरो की तरह "oh shit " बोलू, लेकिन ऐसा होने से पहले ही अक्सर मेरी साइकिल की चैन उतर जाती, वो भी तब जब मै स्पीड बढाने के चक्कर में गद्दी से उठ उठ के पेडल मार रहा होता, सिचुएशन तो बनती थी "oh shit " कहने की लेकिन साइकिल के डंडे की वजह से गले मे कुछ अटक सा जाता और इस तरह मै फिर "oh shit " न कह पाता. हालांकि मैंने शीशे मे कई बार प्रैक्टिस की थी "oh shit " बोलने की, और मुझे धीरे धीरे यकीन भी हो गया था की जिस दिन मैं "oh shit " बोल दूंगा उस दिन से शायद मेरी जिन्दगी आसान हो जायेगी, पर जब भी सिचुएशन आई जहां "oh shit " बोला जा सकता था वहाँ मैं या तो अक्सर रोया या हंसा, और बाद मे "oh shit " न बोल पाने पर खुद की नज़रों मे गिर गया. "oh shit " बोलना मेरी जिन्दगी का मकसद सा बनता जा रहा था और मेरे घर मे तब तक टेलीफोन भी लग चुका था.
दिमाग से शातिर मैं बचपन से ही था, लेकिन सिर्फ प्लानिंग मे, तो मैंने प्लान बनाया की रोंग नंबर डायल करूंगा उधर से आवाज आएगी "हेल्लो किस से बात करनी है" तो मैं बोलूँगा "जी प्रिया है" वो बोलेंगे रोंग नंबर और मैं "oh shit " कहके फोन काट दूंगा. तो एक शाम जब घर मै कोई ना था मैंने धड़कते हुए दिल के साथ नंबर मिलाया, अन्दर से रोमांच भी था की आज बरसों की ख्वाहिश पूरी हो जायेगी, घंटी जाने लगी थी और मुझे लगा की शायद मुझे टॉयलेट जाना है, ऐसा मुझे अक्सर एग्जाम से पहले लगता था, या फिर छुपान छुपाई खेलते वक़्त किसी बहुत ही ख़ुफ़िया जगह मे छिपने के बाद लगता था. हाँ तो घंटी जा रही थी और साथ ही दिल की धडकनें बढती जा रही थी, तभी किसी ने फ़ोन उठाया, मैंने हड़बड़ी मे बिना उसकी हेल्लो सुने अपने रटे रटाये डायलॉग बोलने शुरू किये.
मैं - जी प्रिया से बात हो जायेंगी.
उधर से कोई जवाब नहीं.
मैं : हेलो जी प्रिया जी घर पे हैं.
उधर से एक 5 , 6 साल के बच्चे की आवाज आती है, चाचा जी नमत्ते. और शायद उसकी माँ की बेकग्राउंड आवाज भी आती है जो कहीं दूर से उसे नमस्ते करने की हिदायत दे रही थी.
मैं : बेटा मैं चाचा नहीं बोल रहा हूँ प्रिया जी से बात हो जायेंगी क्या.
बच्चा : चाचा जी नम्त्ते, चाची को भी नमत्ते.
मैं बेचैन होता हुआ : नमस्ते बेटा, मम्मी से बात कराओ.
बच्चा : मम्मी ना खाना बना ली है, (फिर से बेकग्राउंड से उसकी माँ की आवाज आई और उस को सुन के बच्चे ने मुझे बताया) मै आज इस्कूल गया था.
मै इतने गुस्से मे था की उसके घर का पता निकाल के शायद अद्धा मार के कोई खिड़की विड्की तोड़ आता लेकिन मैं अक्सर बच्चों से तमीज से बात करता हूँ, मैंने फिर से हिम्मत जुटाई और कहा-
बेटा घर मे कोई बड़ा नहीं है.
बच्चा - मैं अब बड़ा हो गया हूँ चाचाजी, इत्ता बड़ा.
शायद उसने कोई इशारा किया था हाथों से जो मैं देख नहीं पाया की वो कित्ता बड़ा हो गया है, और ये मुझे इसीलिए पता है की "इत्ता बड़ा" कहते वक़्त रिसीवर उस के मुंह से दूर गया था.
मैंने अपने आप को संभाला और अब मुझे टॉयलेट नहीं आ रहा था - मैंने कहा बेटा मम्मी से बात कराओ.
अब वो बच्चा भी शायद मेरी बातों से बोर हो गया था, या उसे भी मुझे गाली देने का मन कर रहा हो, या वो भी "oh shit "कहने का मौका तलाश रहा हो मुझे नहीं पता, लेकिन उसके भागने की आवाज मैंने सुनी, और ये भी सुना - मम्मी मम्मी, चाचा जी बात करेंगे.
उसकी माँ के रिसीवर के पास आने की आवाज अब मैं सुन सकता था, मैं सतर्क हो गया, एक एक कदम मुझे भुतहा फिल्मो के एंड सीक्वेंस की याद दिला रहा था, और शायद मुझे फिर से टॉयलेट आने लगा था. लेकिन अन्दर एक अलग ही ख़ुशी थी की आज "oh shit " ना बोल पाने के कलंक से आजादी मिलेगी. शायद जिस तरह रोडवेज बस मे मिलने वाली जनरल नोलेज की किताब मे पढाया जाता है की किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस थी, या बछेंद्री पाल एवरेस्ट पे चढ़ने वाली पहली महिला, या फलाना स्टेशन ट्रेन के साथ १० किलोमीटर तक चलता है, या पहली ट्रेन पुणे से थाणे के बीच चली थी, वैसे ही कुछ सालों बाद उन किताबो मे ये भी आये "फलां" आदमी ने, सार्वजनिक जीवन मे "oh shit " पहली बार तब बोला था. इस सब को सोचते सोचते मैंने ध्यान ही नहीं दिया की पिताजी मेरे पीछे आके खड़े हो गए हैं, और उन्होंने बिना कुछ कहे ही रिसीवर मेरे हाथ से छीन लिया है. मुझे काटो तो खून नहीं.
पिताजी : हेलो हांजी कौन,
बच्चे की मम्मी : हांजी आप कौन
पिताजी : अरे आप बताइए आप कौन और मेरे बेटे से क्या बात कर रहीं थी.
बच्चे की मम्मी : हाय राम आपका बच्चा कहाँ से आया बच्चा तो मेरा और मेरे पति का पर्सनल है.
पिताजी : अजीब बात कर रही हैं आप, भूमि पूजन हम करैं और बिल्डिंग बनाए आप.
बच्चे की मम्मी : कैसी अश्लील बातें कर रहे हैं, मैं आपके नंबर की अभी रिपोर्ट करवाउंगी, मेरे पति पुलिस मे ही हैं.
पिताजी : आप कौन बोल रही है बहन जी.
बच्चे की मम्मी : मैं भगवान् टाकीज थाना प्रभारी की घरवाली.
पिताजी : "oh shit "
मैं वही खड़ा था, और मुझे बहुत देर से लग रहा था की मुझे टॉयलेट कर ही आना चाहिए. लेकिन तब तक पिताजी का झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ चुका था. और मुझे टॉयलेट जाने के लिए बहुत देर हो चुकी थी.
दिमाग से शातिर मैं बचपन से ही था, लेकिन सिर्फ प्लानिंग मे, तो मैंने प्लान बनाया की रोंग नंबर डायल करूंगा उधर से आवाज आएगी "हेल्लो किस से बात करनी है" तो मैं बोलूँगा "जी प्रिया है" वो बोलेंगे रोंग नंबर और मैं "oh shit " कहके फोन काट दूंगा. तो एक शाम जब घर मै कोई ना था मैंने धड़कते हुए दिल के साथ नंबर मिलाया, अन्दर से रोमांच भी था की आज बरसों की ख्वाहिश पूरी हो जायेगी, घंटी जाने लगी थी और मुझे लगा की शायद मुझे टॉयलेट जाना है, ऐसा मुझे अक्सर एग्जाम से पहले लगता था, या फिर छुपान छुपाई खेलते वक़्त किसी बहुत ही ख़ुफ़िया जगह मे छिपने के बाद लगता था. हाँ तो घंटी जा रही थी और साथ ही दिल की धडकनें बढती जा रही थी, तभी किसी ने फ़ोन उठाया, मैंने हड़बड़ी मे बिना उसकी हेल्लो सुने अपने रटे रटाये डायलॉग बोलने शुरू किये.
मैं - जी प्रिया से बात हो जायेंगी.
उधर से कोई जवाब नहीं.
मैं : हेलो जी प्रिया जी घर पे हैं.
उधर से एक 5 , 6 साल के बच्चे की आवाज आती है, चाचा जी नमत्ते. और शायद उसकी माँ की बेकग्राउंड आवाज भी आती है जो कहीं दूर से उसे नमस्ते करने की हिदायत दे रही थी.
मैं : बेटा मैं चाचा नहीं बोल रहा हूँ प्रिया जी से बात हो जायेंगी क्या.
बच्चा : चाचा जी नम्त्ते, चाची को भी नमत्ते.
मैं बेचैन होता हुआ : नमस्ते बेटा, मम्मी से बात कराओ.
बच्चा : मम्मी ना खाना बना ली है, (फिर से बेकग्राउंड से उसकी माँ की आवाज आई और उस को सुन के बच्चे ने मुझे बताया) मै आज इस्कूल गया था.
मै इतने गुस्से मे था की उसके घर का पता निकाल के शायद अद्धा मार के कोई खिड़की विड्की तोड़ आता लेकिन मैं अक्सर बच्चों से तमीज से बात करता हूँ, मैंने फिर से हिम्मत जुटाई और कहा-
बेटा घर मे कोई बड़ा नहीं है.
बच्चा - मैं अब बड़ा हो गया हूँ चाचाजी, इत्ता बड़ा.
शायद उसने कोई इशारा किया था हाथों से जो मैं देख नहीं पाया की वो कित्ता बड़ा हो गया है, और ये मुझे इसीलिए पता है की "इत्ता बड़ा" कहते वक़्त रिसीवर उस के मुंह से दूर गया था.
मैंने अपने आप को संभाला और अब मुझे टॉयलेट नहीं आ रहा था - मैंने कहा बेटा मम्मी से बात कराओ.
अब वो बच्चा भी शायद मेरी बातों से बोर हो गया था, या उसे भी मुझे गाली देने का मन कर रहा हो, या वो भी "oh shit "कहने का मौका तलाश रहा हो मुझे नहीं पता, लेकिन उसके भागने की आवाज मैंने सुनी, और ये भी सुना - मम्मी मम्मी, चाचा जी बात करेंगे.
उसकी माँ के रिसीवर के पास आने की आवाज अब मैं सुन सकता था, मैं सतर्क हो गया, एक एक कदम मुझे भुतहा फिल्मो के एंड सीक्वेंस की याद दिला रहा था, और शायद मुझे फिर से टॉयलेट आने लगा था. लेकिन अन्दर एक अलग ही ख़ुशी थी की आज "oh shit " ना बोल पाने के कलंक से आजादी मिलेगी. शायद जिस तरह रोडवेज बस मे मिलने वाली जनरल नोलेज की किताब मे पढाया जाता है की किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस थी, या बछेंद्री पाल एवरेस्ट पे चढ़ने वाली पहली महिला, या फलाना स्टेशन ट्रेन के साथ १० किलोमीटर तक चलता है, या पहली ट्रेन पुणे से थाणे के बीच चली थी, वैसे ही कुछ सालों बाद उन किताबो मे ये भी आये "फलां" आदमी ने, सार्वजनिक जीवन मे "oh shit " पहली बार तब बोला था. इस सब को सोचते सोचते मैंने ध्यान ही नहीं दिया की पिताजी मेरे पीछे आके खड़े हो गए हैं, और उन्होंने बिना कुछ कहे ही रिसीवर मेरे हाथ से छीन लिया है. मुझे काटो तो खून नहीं.
पिताजी : हेलो हांजी कौन,
बच्चे की मम्मी : हांजी आप कौन
पिताजी : अरे आप बताइए आप कौन और मेरे बेटे से क्या बात कर रहीं थी.
बच्चे की मम्मी : हाय राम आपका बच्चा कहाँ से आया बच्चा तो मेरा और मेरे पति का पर्सनल है.
पिताजी : अजीब बात कर रही हैं आप, भूमि पूजन हम करैं और बिल्डिंग बनाए आप.
बच्चे की मम्मी : कैसी अश्लील बातें कर रहे हैं, मैं आपके नंबर की अभी रिपोर्ट करवाउंगी, मेरे पति पुलिस मे ही हैं.
पिताजी : आप कौन बोल रही है बहन जी.
बच्चे की मम्मी : मैं भगवान् टाकीज थाना प्रभारी की घरवाली.
पिताजी : "oh shit "
मैं वही खड़ा था, और मुझे बहुत देर से लग रहा था की मुझे टॉयलेट कर ही आना चाहिए. लेकिन तब तक पिताजी का झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ चुका था. और मुझे टॉयलेट जाने के लिए बहुत देर हो चुकी थी.





