रिलेशनशिप, जिसे ज्ञानी लोग चक्कर भी बोलते हैं, उसके आमतौर पर तीन पड़ाव होते हैं। चुम्मा-चटौव्वल, मान-मनौव्वल और सर-फुटौवल्ल।
चुम्मा-चटौवल्ल से तात्पर्य यहाँ रोमान्स से है। हालाँकि ये आगाह कर दे कि ये शब्द सुन के ही अपनी उम्मीदों के घोड़े न दौड़ायें। कइयों को हाथ पकड़ने से ज़्यादा का सुअवसर नहीं मिलता पहले स्टेज में। बहरहाल, पहले स्टेज में सबको अपनी प्रेमकहानी युगयुगान्तर तक चलने वाली सातो जनम की सुखद दास्तान लगती है। ये वो वक़्त है जब हर रोमांटिक गाना आपके जीवन की कहानी लगता है।
उसके बाद बारी आती है मान-मनौवल्ल की। इस स्टेज में छोटे मोटे झगड़े होते हैं। इस वक़्त आपको आपके साथी का रूठना या जलना थोडा क्यूट सा लगता है। और झगड़ों को अवधि भी छोटी होती है। महज़ दूसरे की तारीफों के पुल बांधने से, एक स्वीट सा मैसेज भेजने से और ज़्यादा से ज़्यादा किसी के भी एक दो आँसू ढलक जाने से सारी समस्या सॉल्व हो जाती है, और तो और ऐसी लड़ाईयों के बाद कुछ स्पेशल भी मिल सकता है। wink इमोटिकॉन
अब आता है वो स्टेज जो 90 प्रतिशत चक्करों का काल साबित होता है। माथा-फुटौवल्ल सबसे खतरनाक और मर्मान्तक पीड़ा देने वाला पड़ाव है। ये तब आता है जब वही झगड़े और वही जलन क्यूट नहीं रहते बल्कि कभी कभी तो आपका मन अगले को चोकस्लैम मारने का करता है। वही बातें जो कभी भीषण रोमांटिक मालूम होती थी वो अब irritating और चेप लगती है। जिसपे कभी aww होता था उसी पर अब awwkthuu करने का जी करता है। सबसे गंभीर स्टेज में आपका दैनिक झगड़ा और रोज़ ब्रेक अप होता है। अब जा के आपको लगता है कि प्यार मोहब्बत चूतियों का रोग है और हर उस लम्हे को कोसते है जब आपने चूतिया बनना क़ुबूल किया था। संभवतः ये स्टेज आपके प्यार के लिए जानलेवा साबित होगा but अगर तब भी survive कर गए तो आपका राम ही मालिक है क्योंकि आपको सच्चा वाला इश्क़ हुआ है। हालाँकि इसमें भी खुश होने की बात नहीं। अगर आपने जाति धर्म मिला के चक्कर नहीं चलाया था तो आपका जय हिन्द। मगर इसके अलावा जो बचते हैं उनको भी खुश होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि इसके बाद एक बहुत बड़ा हादसा आपका इंतज़ार कर रहा है, शादी!
चुम्मा-चटौवल्ल से तात्पर्य यहाँ रोमान्स से है। हालाँकि ये आगाह कर दे कि ये शब्द सुन के ही अपनी उम्मीदों के घोड़े न दौड़ायें। कइयों को हाथ पकड़ने से ज़्यादा का सुअवसर नहीं मिलता पहले स्टेज में। बहरहाल, पहले स्टेज में सबको अपनी प्रेमकहानी युगयुगान्तर तक चलने वाली सातो जनम की सुखद दास्तान लगती है। ये वो वक़्त है जब हर रोमांटिक गाना आपके जीवन की कहानी लगता है।
उसके बाद बारी आती है मान-मनौवल्ल की। इस स्टेज में छोटे मोटे झगड़े होते हैं। इस वक़्त आपको आपके साथी का रूठना या जलना थोडा क्यूट सा लगता है। और झगड़ों को अवधि भी छोटी होती है। महज़ दूसरे की तारीफों के पुल बांधने से, एक स्वीट सा मैसेज भेजने से और ज़्यादा से ज़्यादा किसी के भी एक दो आँसू ढलक जाने से सारी समस्या सॉल्व हो जाती है, और तो और ऐसी लड़ाईयों के बाद कुछ स्पेशल भी मिल सकता है। wink इमोटिकॉन
अब आता है वो स्टेज जो 90 प्रतिशत चक्करों का काल साबित होता है। माथा-फुटौवल्ल सबसे खतरनाक और मर्मान्तक पीड़ा देने वाला पड़ाव है। ये तब आता है जब वही झगड़े और वही जलन क्यूट नहीं रहते बल्कि कभी कभी तो आपका मन अगले को चोकस्लैम मारने का करता है। वही बातें जो कभी भीषण रोमांटिक मालूम होती थी वो अब irritating और चेप लगती है। जिसपे कभी aww होता था उसी पर अब awwkthuu करने का जी करता है। सबसे गंभीर स्टेज में आपका दैनिक झगड़ा और रोज़ ब्रेक अप होता है। अब जा के आपको लगता है कि प्यार मोहब्बत चूतियों का रोग है और हर उस लम्हे को कोसते है जब आपने चूतिया बनना क़ुबूल किया था। संभवतः ये स्टेज आपके प्यार के लिए जानलेवा साबित होगा but अगर तब भी survive कर गए तो आपका राम ही मालिक है क्योंकि आपको सच्चा वाला इश्क़ हुआ है। हालाँकि इसमें भी खुश होने की बात नहीं। अगर आपने जाति धर्म मिला के चक्कर नहीं चलाया था तो आपका जय हिन्द। मगर इसके अलावा जो बचते हैं उनको भी खुश होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि इसके बाद एक बहुत बड़ा हादसा आपका इंतज़ार कर रहा है, शादी!
