*वीरेंद्र सहवाग

एक ऐसी कहानी जिससे हर कोई रूबरू है। मैंने "शोले" के धरम जी के बाद "वीरू" नाम सिर्फ सहवाग के लिए ही सुना है। टी20 का चलन तो आज है पर सहवाग!! सहवाग तो पिछले 15 सालों से टी20 का अनुभव दिलाते रहे हैं।
भसड़ का अंदाज़ा इसी से लगा सकते हैं आप के 10 सबसे तेज़ दोहरे शतक में से 5 वीरू के नाम हैं। 2 तिहरे शतक का तो कोई जवाब ही नहीं। वो वनडे में 219 रनों की पारी भुलाये नही भूलती।सहवाग की बाद मैंने ऐसी बम्पर पेलाई करते सिर्फ 'बाहुबली' को ही देखा है!! "आतंकवाद" क्या होता है 'मुल्तान' में आपने महसूस करा ही दिया था पाकिस्तान को! मुझे अभी भी याद है के मैच के दिन मैं इंट्रोल(इंटरवल) में ही भाग आया करता था सरकारी स्कूल में पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यही था के आपकी बैटिंग कभी नहीं छुटती थी!! वो रेलम रेल चौक़े अहा!(सोच के आज लिखते वक़्त मुस्कराहट आजा रही है।) हर आदमी का बुरा दौर आता है और तब देश के चूतिया चूतिया भी नेता बनके आपको समझाने आजाते हैं पर आपकी अलग खासियत थी आपने कभी किसी की नहीं सुनी.. मैंने कभी किसी की न सुन्ना भी आप ही से सीखा है।
सचिन, द्रविड़ और गांगुली के बिच अपनी एक अलग छवि बनाना आपकी महानता को दर्शाता है। आपका इस तरह सन्यास लेना दुर्भाग्यपूर्ण था और उससे भी बड़ा दुर्भाग्य ये था के जिस वीरू की बैटिंग को हम "आज" इतना मिस कर रहें हैं उसको वापस बुलाने के लिए... उस खिलाड़ी के बुरे दौर में हमसे आवाज तक न निकली?? परसों जब आपके सन्यास की अफ़वाह उड़ी तो लोगो को उनका "सुल्तान" याद आगया.. खैर ये दुनिया बहुत मतलबी है।
आप हमारे दौर के स्टार हो। और जो जबराट बल्लेबाज़ी हमने देखी है आज के "प्रिंस चार्मिंग" और "कूल डूड पप्पू" कभी नहीं देख पाएंगे।
मेरे लिए तो क्रिकेट तभी ख़त्म हो गया था जब सचिन ने सन्यास लिया था। आपके जाने के बाद जो टीस है वो उस दौर की जनरेशन ही समझ सकती है।आपकी बल्लेबाजी तो रेडियो पर भी उत्साहित कर दिया करती थी। कई बार धमाकेदार वापसी की है अपने। अफ़सोस ये है के अब न छक्के से शतक लगता देख पाएंगे और न ही लहलहाता हुआ तिहरा शतक...।
उमर गुल के एक ओवर में 5 चौकों की पेलाई अभी तक याद है मुझे। शायद ही ऐसा कोई गेंदबाज हो जो कभी ये सोचता हो के 'सहवाग' को बॉलिंग करूँ। "सक़लैन मुश्ताक़" का दोहरा शतक आप ही ने पूरा करवाया था। गेंदबाज को नहीं गेंद को देखने वाले सहवाग दिल में बस गए हैं आप।
आपके उज्जवल भविष्य के लिए हर क्रिकेट प्रेमी हर भारतीय के दिल से शुभकामनायें निकल रही हैं।मुस्कुराते रहिये! चलते रहिये!! कई बल्लेबाज़ आएंगे और सन्यास लेके चले जायेंगे पर वीरू.. हम हमेशा मैच देखते हुए यही कहेंगे..
"ओपनर?? ओपनर तो सहवाग था"
(*लिखना तो बहुत कुछ चाहता हूँ आज... पर आज पर्याप्त शब्द ही नहीं है.. अब पता नहीं दोबारा ये क़लम किस योद्धा के लिए उठेगी..!)आप मेरे सुपरमैनमैं आपका सुपरफैन
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